Hindi Shayari /Poetry  तुझे लिखती भी हूँ रोज़..मिटाती भी हूँ रोज़ इस तरह..इन दिनों..अपने दिन मैं..गुज़ारती हूँ रोज़ रूह छिल सी जाती..जब इसमें तुझको गोदती तेरी चाहत…

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